Aaditya Energy Foundation
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Abstracts
 
Title : ऊर्जा, पर्यावरण ऍवम जलवायु परिवर्तन.......

ऊर्जा का उत्पादन ऍवम उपयोग प्रारम्भिक रूप मे पर्यावरण ऍवम् दूरगामी तौर पर जलवायु पर गम्भीर ऍवम व्यापक प्रभाव डालता रहा है / 19वीं शदी की त्वरित औदौगिक क्रांति ऍवम उर्जा की निरंतर बढती खपत ने पृथ्वी पर मानव अस्तित्व के सन्दर्भ मे उर्जा, पर्यवरण ऍव जलवायु के संतुलन को अस्थिर कर दिया है, और पर्यावरण ऍवम जलवायु परिवर्तन की दिशा, धरती पर मानव जीवन के अस्तिव के विपरीत बह चली है/ ईस शदी के वर्तमान समय मे समस्त विश्व, विश्वपरीय भू - भुगौलिक तापमान बृधि के रूप मे प्रकृति के विनासकारी स्वरूप को देखकर् ईस धरा पर अपने अस्तित्व के खतरे का अनुमान कर् चिंतित ऍवम सजग है/ इस सन्दर्भ मे पर्यावरण प्रदूषण एवं जलवायु परिवर्तन इस शदी की प्रमुख ऍवम सर्वधिक विवादित तथा चर्चित समस्या रही है / प्रस्त्तुत पुस्तक की रूप रेखा ऍवम बिषय - बस्तु का आधर पृथ्वी के पर्यावरण पर आयोजित विभिन्न सम्मेलनो जैसे संयुक्त राष्ट्र संघ मानव पर्यावरण सम्मेलन 1972 (Earth Summit – UN Conference on the Human Environment - 1972) से लेकर वर्तमान शदी ऍवम समय मे कोपेनहेगन समझौते के दौरान विभिन्न समझौतो की सन्दर्भ भूमिका मे चिंतनीय तथा नाजुक ऊर्जा उत्पादन ऍवम उपयोग, पर्यावरण प्रदूषण ऍवम जलवायु परिवर्तन सम्बधी करको और आर्थिक मामलों पर ईससे पड्ने वाले परिणमो की जो भी चर्चा अथवा विवेचना ऍवम समिक्षा हुइ है, का विवेचनात्मक अध्यन ऍवम विश्लेषण करना है , ताकि क्यैटो प्रोटोकोल की सन 2012 मे अवधि समाप्त होने पर नयी विश्वस्तरीय व्यवस्था बनाने की दिशा मे पहल की जा सके/


Author : Dr. Jagdish P. N. Giri - Founder Chairman & Executive Director, Aaditya Energy Foundation, Chennai, India